Champaran and Kheda Movement in Hindi

Champaran and Kheda Movement in Hindi -: गांधीजी द्वारा सन 1918 में चलाया गया ‘चंपारन और खेड़ा सत्याग्रह’ भारत में उनके आंदोलनों की शुरुआत थी और इसमें वे सफल रहे. चंपारण और खेड़ा के किसान आन्दोलनों (Champaran and Kheda Movement) के महत्त्व की बारे में यदि बात करें तो ये दोनों आन्दोलन पूर्व के आन्दोलनों की तुलना में बहुत शांत तरीके से संपन्न किए गए थे.

Champaran and Kheda Movement in Hindi

Champaran and Kheda Movement in Hindi | चंपारण और खेडा आन्दोलन हिंदी में

चंपारण और खेड़ा आन्दोलन क्यों हुआ

ये सत्याग्रह ब्रिटिश लैंडलॉर्ड के खिलाफ चलाया गया था. इन ब्रिटिश लैंडलॉर्ड द्वारा भारतीय किसानों को नील [indigo] की पैदावार करने के लिए जोर डाला जा रहा था और इसी के साथ हद तो यह थी कि उन्हें यह नील एक निश्चित कीमत पर ही बेचने के लिए भी विवश किया जा रहा था और भारतीय किसान ऐसा नहीं चाहते थे. तब उन्होंने महात्मा गांधी की मदद ली. इस पर गांधीजी ने एक अहिंसात्मक आंदोलन चलाया और इसमें सफल रहे और अंग्रेजों को उनकी बात मानना पड़ी.

चंपारण और खेड़ा आन्दोलन कैसे हुआ

इसी वर्ष खेड़ा नामक एक गाँव, जो गुजरात प्रान्त में स्थित हैं, वहाँ बाढ़ [flood] आ गयी और वहाँ के किसान ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाये जाने वाले टैक्स भरने में असक्षम हो गये. तब उन्होंने इसके लिए गांधीजी से सहायता ली और तब गांधीजी ने ‘असहयोग [Non-cooperation]’ नामक हथियार का प्रयोग किया और किसानों को टैक्स में छूट दिलाने के लिए आंदोलन किया. इस आंदोलन में गांधीजी को जनता से बहुत समर्थन मिला और आखिरकार मई, 1918 में ब्रिटिश सरकार को अपने टैक्स संबंधी नियमों में किसानों को राहत देने की घोषणा करनी पड़ी.

Champaran and Kheda Movement in Hindi

गांधीजी द्वारा सन 1918 में चलाया गया ‘चंपारन और खेड़ा सत्याग्रह’ भारत में उनके आंदोलनों की शुरुआत थी और इसमें वे सफल रहे. चंपारण और खेड़ा के किसान आन्दोलनों (Champaran and Kheda Movement) के महत्त्व की बारे में यदि बात करें तो ये दोनों आन्दोलन पूर्व के आन्दोलनों की तुलना में बहुत शांत तरीके से संपन्न किए गए थे.

चंपारण और खेड़ा आन्दोलन का महत्त्व

चंपारण और खेड़ा के किसान आन्दोलनों (Champaran and Kheda Satyagraha) के महत्त्व की बारे में यदि बात करें तो ये दोनों आन्दोलन पूर्व के आन्दोलनों की तुलना में बहुत शांत तरीके से संपन्न किए गए थे. किसानों ने सत्याग्रह कर के सरकार को विवश कर दिया कि वह उनकी दशा में सुधार लाये. दोनों आन्दोलनों में किसानों की जीत हुई. इन आन्दोलनों से किसानों के साथ-साथ पूरे भारतवर्ष में उत्साह का संचार हुआ और आत्मविश्वास की भावना जगी. 1919 ई. के बाद किसानों ने अधिक संगठित रूप से आन्दोलन किए. किसान सभा नामक शक्तिशाली किसान संगठन की स्थापना भी हुई.

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